15 नवंबर का इतिहास: आज ही के दिन नाथूराम को लटकाया गया फांसी पर

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History of 15 November

इतिहास के पन्नों में बहुत से ऐसे दिन है जो हमेशा ही हमारे ज़हन में अच्छी और बुरी यादों के साथ रहेंगे। इन्हीं में से एक आज का भी दिन है। ये दिन है महात्मा गांधी की हत्या के दोषी नाथूराम गोडसे की फांसी का दिन। नाथूराम गोडसे को 15 नवंबर 1949 को फांसी दी गई। 15 नवम्बर (History of 15 November) की ये तारीख नाथूराम की यादों से सनी है और जब बात नाथूराम की हो तो महात्मा गांधी की बात पहले होगी। 30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली के बिड़ला भवन में महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। ये तो सभी जानते हैं कि नाथूराम ने महात्मा गांधी को भरी भीड़ में गोली मार दी थी और साढ़े 22 महीने (History of 15 November) बाद गोडसे को फांसी दे दी गई, लेकिन क्या आप जानते हैं गोडसे कौन था और उसने महात्मा गांधी को गोली क्यों मारी। चलिए आपको बताते है इस पूरे घटनाक्रम के बारे में…

नाथूराम गोडसे को फांसी नहीं मिलनी चाहिए थी

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नाथूराम के नाम से लगता था कि वो हिम्मती और दबंग किस्म के इंसान रहा होंगा मगर सच्चाई इससे एकदम अलग थी। 19 मई 1910 में पैदा हुआ नाथूराम एक कट्टर हिन्दू थाअंधविश्वास की वजह से नाथूराम गोड़से का असली नाम ‘नथूराम’थाअंधविश्वास की वजह से नाथूराम के परिवार में उससे पहले जितने भी लड़के पैदा हुए, सबकी मौत हो गई थी। जब नथू पैदा हुए तो अंधविश्वास की वजह से परिवार ने उन्हें लड़कियों की तरह पाला। बकायदा नथ तक पहनाई गई और लड़कियों के कपड़ों में रखा गया। इसी नथ के कारण उनका नाम नथूराम पड़ा था।

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धार्मिक पुस्तकों में गहरी रुचि होने के कारण रामायण, महाभारत, गीता, पुराणों के अतिरिक्त महात्मा गान्धी के साहित्य का इन्होंने गहरा अध्ययन किया था। अपने राजनैतिक जीवन के प्रारम्भिक दिनों में नाथूराम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में शामिल हो गये। प्रारम्भ में तो गोड़से ने महात्मा गांधी के कार्यक्रमों का समर्थन किया परन्तु बाद में गान्धी की नीतियों के कारण वे गान्धी के प्रबल विरोधी हो गए। इसके बाद जब भारत विभाजन के समय गाँधी ने भारत और पाकिस्तान के मुसलमानों के पक्ष का समर्थन किया था जब कि हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर गांधी की चुप्पी गोडसे को खल गई। तब गोडसे ने महात्मा गांधी को मारने की योजना बनाई।

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30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली में महात्मा गांधी प्रार्थना सभा में शामिल होने के लिए मंच की तरफ आगे बढ़ रहे थे, तभी अचानक उनके सामने नाथूराम गोडसे आ गया। गोडसे ने अपने सामने गांधी जी को देखकर हाथ जोड़ लिया और कहा- ‘नमस्ते बापू!’,इसके बाद उसने बापू पर पिस्तौल तान दी और उनके सीने में एक के बाद एक 3 गोलियां दाग दीं।

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ये भी कहा जाता है कि बापू को गोली मारने के बाद सभा में मौजूद लोग डर के मारे उन्हें देखकर पीछे हो गए, लेकिन गोडसे भागा नहीं और पुलिसवाले भी दूर से ही देखते रहे। इसके बाद गोडसे ने खुद पुलिस को बुलाया और सरेंड किया। बापू की हत्या की एफआईआर भी उसी दिन यानी 30 जनवरी को दिल्ली के तुगलक रोड थाने में दर्ज की गई। गांधीजी की हत्या के बाद इस मुकदमे में नाथूराम गोडसे समेत 8 लोगों को आरोपी बनाया गया था और नाथूराम गोडसे को 15 नवंबर 1949 को फांसी पर लटका दिया गया।

नाथूराम गोडसे की मौत के बाद किसी ने उसे हत्यारा बताया तो किसी ने उसे देशभक्त की उपाधि दे दी। लेकिन नाथूराम गोडसे के इन्हीं दोनों नामों को लेकर आज भी राजनीति जारी है।

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