अमृतसर ट्रेन हादसा: अचानक आई ट्रेन और बिछ गईं लाशें’, जानिए क्या हुआ था उस दिन

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Amritsar Train Accident

आज पूरा देश बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मना रहा है। यानि पूरे देश में पटाखों के साथ विजयदशमी का त्यौहार मनाया जा रहा है। देश के कोने-कोने में रावण के पुतले जलाए जा रहे है, लेकिन देश का एक ऐसा भी हिस्सा है जहां मातम मनाया जा रहा है। जी हां, आज के दिन का मातम…मातम रावण के जलने के दिन का… मातम उस दिन का जब दर्जनों बेकसूर लोग ट्रेन के नीचे आ गए और हर तरफ चीख-पुकार की आवाजें आने लगी। हम बात करे रहे है पिछले साल के अमृतसर के जोड़ा फाटक रेल हादसे (Amritsar Train Accident) की। वही रेल हादसा जब दर्जनों लोगों को रौंदते निकल गई थी ट्रेन। चाहकर भी नहीं कोई नहीं भूलता वो दर्दनाक मंजर। तारीख चाहे बदली है लेकिन पिछले साल की मनहूस यादें आज भी यहां के लोगों के मन में ताजा है।

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हादसे (Amritsar Train Accident) को एक साल हो गया है लेकिन हर घर में पिछले दशहरे का मातम साफ नजर आ रहा है। किसी का पुत्र चला गया तो किसी का सुहाग, किसी को राखी बांधने वाले हाथ नहीं रहे तो किसी घर का चिराग बुझ गया। अमृतसर के जोड़ा फाटक में हुए इस दर्दनाक हादसे को कौन भूल सकता है। जब रेल पटरी पर खड़े होकर रावण दहन देखते 60 से अधिक लोगों की जान ट्रेन से कटकर चली गई थी।

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इस आयोजन की मुख्य अतिथि नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी थीं। पीड़ित परिवारों का कहना है कि हादसे के बाद पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू और उनकी पत्नी ने पीड़ित परिवारों के लोगों को गोद लेने, आश्रित परिवारों के एक सदस्य को नौकरी देने और इलाज का खर्च देने का वादा किया था। रेल हादसे में 60 से अधिक मौतों पर सियासत तब भी हुई थी और आज भी हो रही है, कहानी बदली नहीं है। केवल 5 लाख की रकम देकर सरकार ने हाथ खड़े कर दिए और धीरे-धीरे दिन बीतने के साथ सरकार दूसरे हादसों की तरह इसे भी भूल गई।

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हालांकि पीड़ित परिवार आज भी आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, लेकिन 2018 में जो क्रूर घटना की उससे इस बार रावण दहन को लेकर शहर भर में तैयारियां फीकी हो गई। इस बार रावण दहन की तैयारियों में वो खुशी और उल्लास घूम हो गया है। उन यादों के पीछे आज के दिन का सारा उत्साह भी काला हो गया है। मां की ममता आज भी रो रही है, बहनें भाई की तस्वीर देख आंसू बहा रही हैं, लेकिन कोई पूछने वाला नहीं है…

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